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अशोक लवासा का ADB में जाना लोकतंत्र पर काला साया होगा  

लवासा की तब बहुत तारीफ हुई, जब उन्होंने कहा कि ईमानदारी कोई ऐसा बुत नहीं जिसकी पूजा की जाए.

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यह काफी गैरमामूली बात है कि संवैधानिक पद पर बैठे किसी व्यक्ति को सरकार की तरफ से कोई लाभ वाला पद पेश किया जाए. कायदे से उसे सरकार से स्वतंत्र रहकर काम करना होता है. इसीलिए इस बात पर सवाल उठना लाजमी है कि चुनाव आयुक्त अशोक लवासा को सरकार ने एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) के वाइस प्रेसिडेंट के तौर पर नॉमिनेट किया और लवासा ने उस पेशकश को मंजूर भी कर लिया. यूं लवासा के अपने पद से रिटायर होने में दो साल बाकी हैं.

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