वास्तव में इस समय शहबाज शरीफ के लिए जो परिस्थितियां हैं वह उससे बदतर नहीं हो सकती थीं. बंटे हुए गठबंधन और विभाजित देश के प्रधान मंत्री के तौर पर उनके पास एक कठिन काम है. वह काम है पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने का. यह काम ऐसे समय पर तब और भी जटिल हो जाता है जब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था संकट में है और शायद ही कोई मदद का हाथ बढ़ाने के लिए तैयार हो. अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने उसे चेतावनी दी है. हालांकि बहुत ज्यादा खुशी मनाने की जरूरत नहीं है, क्योंकि श्रीलंका की तरह पाकिस्तान की दुर्दशा भी सभी के लिए एक खराब संकेत है. यह एक सबक भी हो सकती है कि आखिर वो क्या है जो क्या नहीं करना है?
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Pakistan Economy लड़खड़ा रही, भारत और अन्य पड़ोसियों के लिए इसके क्या मायने हैं?
श्रीलंका की तरह पाकिस्तान की दुर्दशा भी सभी के लिए एक खराब संकेत है.

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