जब तक भारत के रूप में पाकिस्तान के सामने एक 'दुश्मन' है, एक 'टारगेट' है और कश्मीर के रूप में जब तक उसके पास एक 'भारत-विरोधी एजेंडा' है, तभी तक वहां की सत्ता पर सेना अपना दबदबा बनाये रख सकती है. भारत-विरोध वहां सेना के लिए अस्तित्व का सवाल है.
इसीलिए कश्मीर को वह अपने 'गले की नस' कहते हैं, जो कट जाये, तो शरीर जीवित नहीं रह सकता. तो जब कश्मीर और भारत-विरोध उनके लिए 'जान का सवाल' है, तो यह आशा कैसे की जा सकती है कि वह इसे छोड़ देंगे?
तो भारत-पाकिस्तान के कूटनीतिक मैच में नरेन्द्र मोदी ने पहला गोल कर दिया! और सिर्फ़ एक रात में खेल के सारे नियम बदल दिये. वह मैच जो बरसों से अनवरत एक ही ऊबाऊ, थकाऊ, पकाऊ तरीक़े से जारी था, सहसा उत्तेजक हो गया. लोगों को अचानक लगने लगा कि अरे, इस मैच में भी जीत-हार का खेल हो सकता है! वरना तो लोग मान बैठे थे कि न मैच कभी ख़त्म होगा और न कोई फ़ैसला कभी निकलेगा.
Read Latest News and Breaking News at The Quint, browse for more from hindi and opinion
Topics: उरी हमला सर्जिकल स्ट्राइक
Published:

