संदेशखाली (Sandeshkhali protest) कभी पश्चिम बंगाल का एक शांत गांव हुआ करता था. अब वहां आग धधक रही है, लेकिन ममता बनर्जी के अपने सपने राख हो रहे हैं. जो महिलाएं कल तक उन पर सबसे ज्यादा भरोसा करती थीं, आज उन्हीं की विरोधी बन गई हैं. दीदी से उनका भरोसा उठ चुका है. इसकी वजह पार्टी के भीतर कथित अत्याचार है.
यह सिर्फ एक राजनीतिक नरक नहीं है; यह एक बड़ा व्यक्तिगत विश्वासघात है.

