बंगाल में जारी ताजा हिंसा भारत की सियासी पहेली बन गई है. इसके पात्रों की संख्या प्याज के छिलके की तरह बढ़ती जा रही है. ताजा हिंसा में कितने लोगों की मौत हुई, इसको लेकर परस्पर विरोधी दावे हैं. ये दावे संवैधानिक प्रमुखों द्वारा किए जा रहे हैं. लिहाजा, किसी पत्रकार के लिए यह लिख पाना काफी कठिन है कि चुनाव पूर्व या चुनाव बाद की हिंसा में पश्चिम बंगाल में कुल कितने लोगों ने अपनी जानें गंवाईं.
हमारी मुश्किल यह है कि हम किसकी बात का भरोसा करें. सत्ता के शीर्ष पर बैठीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का, जिन्होंने इस हिंसा में दस लोगों के मारे जाने की बात कही. या फिर, बंगाल में संविधान के कस्टोडियन राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी का, जिन्होंने केंद्र को भेजी अपनी रिपोर्ट में कुल बारह लोगों के मारे जाने (बकौल, ममता बनर्जी) की बात लिखी है.

