प्रेम के बारे में जो कुछ भी लिखा जाता है, वो बीत चुका होता है. हर कही हुई और लिखी हुई बात अधूरी रह जाती है. प्रेम का वर्तमान क्षण दर्ज नहीं किया जा सकता. इसका विश्लेषण और वर्णन उसके बीतने के बाद ही होता है; वो एक मृत प्रेम की थेर गाथा भर है. जिंदा प्रेम को सिर्फ जिया जाता है. उसकी गुनगुनी सांसों को अपनी पीठ पर महसूस किया जा सकता है, उसकी मौजूदगी में तो प्रेमी को अनुपस्थित होना होता है. प्रेम का होना, प्रेमी का न होना है.
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Valentine's Day Special: प्रेम में क्यों होती है इतनी दीवानगी?
Valentine's Day:प्रेम के बारे में जो कुछ भी लिखा जाता है, वो बीत चुका होता है. हर कही और लिखी बात अधूरी रह जाती है

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