उत्तराखंड (Uttarakhand) के हिमालय पर्वतीय क्षेत्र में सुरंग निर्माण के दौरान हुए हादसे में 41 मजदूरों को फंसे हुए 2 हफ्तों से ज्यादा का समय हो गया है. इस हादसे के बाद अधिकारी तो उन्हें बचाने में लगे हैं, लेकिन इस संकटग्रस्त क्षेत्र में विकास परियोजनाओं के प्रति भारत के दृष्टिकोण का फिर से मूल्यांकन जरूरी हो गया है.
हिमालय में प्रोजेक्ट्स से बड़े पैमाने पर पैदा हो रहे जोखिम को इस सड़क सुरंग हादसे ने सामने ला दिया है. इस आपदा का स्त्रोत या तो भूस्खलन हो सकता है या सुरंग की संरचना से जुड़ा कोई कारण, लेकिन ये बताता है कि हमें कितना ध्यान रखने की जरूरत है.
वर्तमान ट्रेंड ये संकेत दे रहे हैं कि राष्ट्रीय सुरक्षा, राजनीतिक लोकलुभावनवाद और ऊर्जा स्रोतों को डीकार्बोनाइज करने की जरूरत ने भारत के दृष्टिकोण को कम सतर्क और ज्यादा तेज बना दिया है.

