“अल-कायदा के अमीर अयमान अल-जवाहिरी की हत्या को काउंटर टेरेरिज्म की कामयाबी के तौर पर बेचा जाएगा. लेकिन यह नेरेटिव इस यकीनी सच्चाई को भी छिपाता है कि तालिबान नियंत्रित अफगानिस्तान अल-कायदा के लिए एक महफूज़ ठिकाना है."
टेरेरिज्म के एक्सपर्ट और लॉन्ग वॉर जर्नल के संपादक बिल रोगियो को हमेशा कुछ संदेह रहा है, और वह सही थे. अमेरिकियों की शर्मनाक और उतावली वापसी के एक साल बाद का काबुल, बीस साल पहले के काबुल से भयावह तरीके से मिलता-जुलता है: एक काबुल जहां तालिबान शैली का अमन है- मरघट जैसा सन्नाटा है. .

