भारतीय राजनीति में आरक्षण नीति का हथियार अंतिम उपाय के रूप में है. बिल्कुल परमाणु हमले की तरह, इसके बाद एक बेकाबू प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो जाता है. आखिरी बार जब भारतीय प्रधानमंत्री ने इस हथियार का इस्तेमाल किया था, इसने भारतीय राजनीति की शक्ल बदल दी थी.
मंडल आयोग की रिफारिशें लागू कर वीपी सिंह ने खुद को पिछड़ों के मसीहा के रूप में पेश किया था. लेकिन लालू प्रसाद यादव, मुलायम सिंह यादव और एचडी देवेगौड़ा जैसे अचानक से उभरने वाले जातीय क्षत्रपों की वजह से वीपी सिंह की सारी योजनाएं धरी की धरी रह गईं.
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