असम (Assam) में उग्रवाद की शुरुआत पचास के दशक के मध्य में हुई जब सांस्कृतिक जगत की मशहूर शख्सियत बिष्णु प्रसाद राभा के नेतृत्व में भारतीय रिवोल्यूशनरी कम्युनिस्ट पार्टी (RCPI) थोड़े समय के लिए हिंसा की छिटपुट गतिविधियों में शामिल रही, जो सरकार की कठोर कार्रवाई के बाद जल्द शांत पड़ गई. एक दशक बाद लाचित सेना (Lachit Sena) जैसे दूसरे ग्रुप भी सामने आए थे जिनका एकमात्र मकसद राज्य में बाहरी लोगों के बढ़ते असर को रोकना था.
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ULFA-केंद्र के बीच शांति समझौता: जब पहले की कोशिशें नाकाम तो दोबारा क्यों मिले हाथ?
1980 के दशक की शुरुआत में ULFA का जन्म असम में विद्रोह के इतिहास में एक नया अध्याय था.

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