24 फरवरी को जैसे ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एयर फोर्स वन भारतीय हवाई क्षेत्र में दाखिल हुआ, कश्मीर के कॉलेजों और स्कूलों के 15 लाख स्टूडेंट करीब सात महीने के लंबे अंतराल के बाद नई उम्मीदों के साथ अपनी पढ़ाई शुरू कर चुके थे.
‘ये महज एक संयोग है,’ गुलाम मोहम्मद गुलपोश ने कहा, जो कि श्रीनगर की एक सरकारी शैक्षणिक संस्थान में टीचर हैं. ‘स्कूलों और कॉलेजों के खुलने से अमेरिकी राष्ट्रपति के दौरे का कोई वास्ता नहीं था. आम तौर पर सर्दियों की सालाना छुट्टी के बाद स्कूल 1 मार्च को खुल जाते हैं. लेकिन सरकार ने इस बार दो वजहों से इसे एक हफ्ते पहले शुरू कर दिया: पहला, पिछले कई वर्षों के बाद इस बार कड़ाके की ठंड बिलकुल खत्म हो गई है. दूसरा ये कि कर्फ्यू और बंदी की वजह से पहले ही छात्रों का कीमती वक्त बर्बाद हो चुका है.’
