नए फैशन के तमाम दिनों की तरह फ्रेंडशिप डे भी बाजार का गढ़ा हुआ, गिफ्ट खरीदने की बाध्यता लेकर आया हुआ त्योहार है. अमेरिकी और यूरोपीय देशों में गर्मी की छुट्टी के दौरान एक दिन दोस्ती के नाम किया गया. वैसे त्योहार कोई सा भी हो, हिन्दुस्तान की दुकानें जरूर सज जाती हैं.
सोचा जाए, तो इसमें गलत ही क्या है. दोस्ती निभाने में यूं भी हमारा कोई सानी नहीं. कृष्ण-सुदामा की हो या दुर्योधन और कर्ण की, शेर या चूहे की हो या फिर हिरण और कौवे की, पौराणिक कथाएं हों या जातक, दोस्ती की अनूठी मिसाल हर रूप में मिल ही जाती है.
हमारे दिल दिमाग को हर कदम पर संचालित करने वाले बॉलीवुड को भी जब-जब प्रेम और बदले से छुट्टी मिली, दोस्ती की आंच पर कुछ ना चढ़ा देता रहा. लेकिन ध्यान रहे, दोस्ती के ये तमाम नायाब किस्से बस एक अधाई को समर्पित हैं. बाकी की आधी आबादी को दोस्ती के लहलहाते महासागर की तलछट भी नसीब नहीं.

