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दुर्गा पूजा और महात्मा: गांधी के साथ हिंदू महासभा के प्रयोगों का क्या मतलब है?

महिषासुर कई दलित और आदिवासी जनजातियों के लिए दानव-वध करने वाली देवी, आर्य ब्राह्मणवादी नैरेटिव के विरोध का प्रतीक है

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एक कमरे में महात्मा गांधी की तस्वीर पर पिस्टल से फायरिंग करने से लेकर कोलकाता हिंदू महासभा के एक सार्वजनिक पूजा पंडाल में देवी दुर्गा द्वारा गांधी वध को दर्शाने तक की घटना एक स्वाभाविक प्रगति है. हिंदू महासभा की जो स्थिति है उसको देखते हुए, महासभा के लिए शायद ही इसमें कुछ नया हो. इस तरह की ध्यान आकर्षित करने वाली घटनाएं महासभा को लोगों को बीच बने रहने के लिए ऑक्सीजन का काम करती हैं. नहीं तो, यह संगठन अपने अतीत की एक धुंधली छाया सा रह गया है, जिसने अपनी सभी प्रासंगिकता, नेतृत्व, कैडर या संरचना को खो दिया है.

यह छोटे, बिखरे हुए, खाली और गर्म मिजाज वाले लोगों में बचा हुआ है जिनकी किसी भी क्षेत्र में कोई पकड़ नहीं है. ये सिर्फ कुछ मिनटों के लिए कभी कभार टीवी डिबेट्स में और कुछ इंच की जगह पर अखबारों में और अब ऑनलाइन न्यूज पोर्टलों में बमुश्किल दिखते हैं. इसके पास भारत या हिंदुओं को कोई सुसंगत, स्पष्ट विजन, विचारधारा, संगठन, भविष्य के लिए ब्लूप्रिंट या का रोडमैप प्रदान करने के लिए कुछ भी नहीं है.

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