Snapshot
- सुप्रीम कोर्ट ने जहां बैन खत्म कर खुद की ही रुलिंग को नकार दिया वहीं ‘अश्लीलता’ पर अभियोजन पक्ष को निर्देश भी दिया
- अदालत ने डांस बारों पर बैन को हटाने को लेकर पिछले साल दिए गए खुद के ही प्रगतिशील फैसले को चोट पहुंचाई
- महाराष्ट्र सरकार के प्रतिबंध लिंग, वर्ग और जाति में भेद करते हैं
- इस बैन ने प्रभावित डांसर्स को अनकहे दुखों, तकलीफों और शोषण की तरफ धकेला
- इस मामले में दोष सरकार का है महिला डांसरों का नहीं जिनपर वो अश्लीलता फैलाने का आरोप लगाती रहती है

