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संडे व्यू: दलित तक सीमित करना अंबेडकर के साथ अन्याय..

पढ़ें इस रविवार सुनंदा के दत्ता रे, गुरु प्रकाश, विनय किरपाल, फैजान मुस्तफा और गोपाल कृष्ण गांधी के विचारों का सार

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राजभवन अब लोकभवन : अब से सारे दलित ब्राह्मण

सुनंदा के दत्ता रे टेलीग्राफ में राजभवनों को कुछ समय जन राजभवन कहने के बाद अब लोकभवनों में बदलने का फैसला सरोजिनी नायडू के उस मशहूर व्यंग्य की याद दिलाता है जिसमें उन्होंने कहा था कि महात्मा गांधी को गरीबी में रखने का खर्च कितना महंगा पड़ता है. लेखक राजभवनों को लोकभवन और प्रधानमंत्री कार्यालय को ‘सेवा तीर्थ’ जैसे नाम देने की आलोचना करते हैं. वे इसे महंगा और अनावश्यक दिखावा मानते हैं, जो भारतीय समाज की गहरी पदानुक्रम और राजशाही वाली मानसिकता को और मजबूत करता है. लेखक सरोजिनी नायडू के उस मशहूर व्यंग्य की याद दिलाते हैं जिसमें उन्होंने कहा था कि महात्मा गांधी को गरीबी में रखने का खर्च कितना महंगा पड़ता है.

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