नियोगी ने स्वंतत्रता, समानता, बंधुत्व को जीया
रामचंद्र गुहा ने टेलीग्राफ में लिखा है कि शंकर गुहा नियोगी की 1991 में हुई हत्या को वे स्वतंत्र भारत के इतिहास में अन्य प्रमुख राजनीतिक मौतों (इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, संजय गांधी आदि) से अधिक गहरा नुकसान मानता है. नियोगी एक मौलिक विचारक, ट्रेड यूनियन नेता और पर्यावरण कार्यकर्ता थे, जिन्होंने मजदूरों को आत्म-सम्मान और समान नागरिकता का भाव दिया. भिलाई स्टील प्लांट में काम शुरू करने के बाद उन्होंने पूर्णकालिक सक्रियता अपनाई. आदिवासी महिला से विवाह कर छत्तीसगढ़ में खनन मजदूरों को संगठित किया. 1977 में छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ (CMSS) और 1979 में छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा (CMM) की स्थापना की, जिसमें महिला, युवा, सांस्कृतिक विंग और मजदूर-वित्तपोषित अस्पताल शामिल थे. उनका काम पारंपरिक यूनियन मुद्दों (मजदूरी, सुरक्षा) से आगे बढ़कर व्यावसायिक स्वास्थ्य, पर्यावरण न्याय, महिलाओं की गरिमा और मशीनीकरण के नकारात्मक प्रभावों पर केंद्रित था.

