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संडे व्यू: बीत गई वैश्वीकरण की दोपहरी, अपराध कानूनों पर उपनिवेशवादी साया

पढ़ें आज टीएन नाइनन, आदिति फडणीस, तवलीन सिंह, मार्क टुली और करन थापर के विचारों का सार.

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बीत गयी वैश्वीकरण दोपहरी

टीएन नाइनन ने बिजनेस स्टैंडर्ड में लिखा है कि नई सदी के शुरुआती ढाई दशकों के समापन की ओर बढ़ते हुए हम कह सकते हैं कि वैश्वीकरण की दोपहर बीत चुकी है.अमेरिका और यूरोप की राजनीति बहुत बुरी तरह अप्रवासी विरोधी भावनाओं से संचालित है और इसमें सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का घालमेल है. (इटली के प्रधानमंत्री यूरोप में इस्लामिक संस्कृति के खिलाफ हैं जबकि डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि प्रवासी अमेरिकी रक्त को ‘विषाक्त’ बना रहे हैं.) इस बीच आर्थिक बहस बढ़ती असमानता और अच्छे रोजगारों की कमी को लेकर मौजूदा असंतोष के लिए वैश्वीकरण और ‘नव उदारवाद’ को उत्तरदायी ठहराती है.

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