महाराष्ट्र, हरियाणा, मध्यप्रदेश दोहराएगा बिहार?
आसिम अली ने टेलीग्राफ में लिखा है कि सर्वेक्षणों के अनुसार, बिहार में एनडीए एक और जीत की ओर अग्रसर है, भले ही नीतीश कुमार की लोकप्रियता घट रही हो और सरकार के प्रदर्शन से असंतोष व्याप्त हो. यह महाराष्ट्र-हरियाणा (2024) तथा मध्य प्रदेश (2023) के पैटर्न को दोहराएगा. बिना स्पष्ट जनादेश के एनडीए की पुनरावृत्ति क्या चुपचाप कल्याणकारी/सांप्रदायिक बहुमत की संतुष्टि दर्शाती है, या निष्क्रिय जनता की यथास्थिति स्वीकृति? क्या यह 'स्थिर' या 'प्रबंधित लोकतंत्र' है? नीतीश 2015 के सात निश्चयों पर विफल रहे; 2020 का नारा था—“क्यों करें विचार… ठीक ही तो हैं नीतीश कुमार”. सात निश्चय 2 बॉलीवुड फ्रैंचाइजी जैसा लॉन्च हुआ. तीन बार गुट-बदलाव ने जवाबदेही कमजोर की. एनडीए का लाभ और सामाजिक गठबंधन चिन्ताजनक सवाल उठाते हैं.

