मिस्टर मोदी झुके पर क्या जीतेंगे?
पी चिदंबरम ने इंडियन एक्सप्रेस में लिखा है कि इसी दो अप्रैल को हम जान जाएंगे कि दुनिया आधुनिक ‘पाइड पाइपर’ की धुन पर नाचेगी या नहीं. अगर संयुक्त राज्य अमेरिका अन्य लक्षित देशों से आयातित वस्तुओं पर दंडात्मक शुल्क लगाता है तो वह विश्व व्यापार संगठन यानी डब्ल्यूटीओ नियमों, बहुपक्षीय और द्विपक्षीय व्यापार समझौतों और अंतरराष्ट्रीय कानूनों और सम्मेलनों का उल्लंघन होगा.
हालांकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कानून की परवाह नहीं है चाहे वह अमेरिकी हो या कोई और. वे खुद एक कानून हैं. डोनाल्ड ट्रंप ने ‘लक्षित’ देशों की पहचान की है और उन देशों से आयातित चुनिंदा वस्तुओं पर वे शुल्क लगाने का इरादा रखते हैं. भारत इस सूची में है.
चिदंबरम लिखते हैं कि संरक्षणवाद को देशभक्ति के साथ भ्रमित किया गया. आत्मनिर्भरता एक मिथक है. कोई भी देश उन सभी वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन नहीं कर सकता है जो उसके लोग चाहते हैं और उपभोग करते हैं. एक संरक्षणवादी देश कमतर विकास, कम निवेश, घटिया सामान, सीमित विकल्प और खराब ग्राहक सेवाओं की पीड़ा का सामना करेगा. पिछले पचास वर्षों के इतिहास ने निर्णायक रूप से स्थापित किया है कि खुली अर्थव्यवस्था और मुक्त व्यापार आर्थिक विकास को बढ़ावा देता है. दुनिया के सबसे अमीर देश वे हैं जो व्यापार और प्रतिस्पर्धा के लिए खुले हैं.

