गांधी, नेहरू को भी देनी होती देशभक्ति की परीक्षा
प्रताप भानु मेहता ने इंडियन एक्सप्रेस में लिखा है कि हरियाणा राज्य बनाम अली खान महमूदाबाद मामले में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश से संवैधानिक मूल्यों की परवाह करने वालों को झटका लगना चाहिए. माननीय न्यायाधीशों ने दयापूर्वक प्रोफेसर खान को जमानत दे दी. नागरिक स्वतंत्रता संरक्षण के हमारे निम्न मानकों के हिसाब से भी उनकी गिरफ्तारी निंदनीय है. लेकिन, राहत देने के आदेश से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सुरक्षा मजबूत होने के बजाए कमजोर होती दिखती है. आदेश की शर्तें अपने आप में अधिकारों का अनुचित हनन हैं. एक शिक्षाविद को अपना पासपोर्ट जमा करने और लिखने से परहेज करने के लिए कहा गया है. अली खान का जेल में नहीं होना ही राहत की बात है.

