राजनीति का केंद्र बन गया है ‘पूजा स्थल अधिनियम’
इंडियन एक्सप्रेस में कपिल सिब्बल ने लिखा है कि जब हम लोगों ने खुद को भारत का संविधान दिया तो हमने कुछ बुनियादी सिद्धांतों को अपनाया जो हमारे गणतंत्र की नींव है. देश के नागरिक को अपनी आस्था, विश्वास की स्वतंत्रता है, यह एक अविभाज्य अधिकार है. इसके अनुसार पूजा करने का अधिकार हमारी सांस्कृतिक परंपराओं में अंतर्निहित है. यह भारत में प्रचलित सभी धर्मों पर लागू होता है जो हमारे बहु सांस्कृतिक समाज का आधार है. वर्तमान में रह रहे हमारे लाखों नागरिकों को अतीत की कथित बर्बर हरकतों के लिए कैसे दोषी ठहराया जा सकता है? ऐसे राजनीतिक एजेंडे जो हमारे गणतंत्र के नागरिकों को ऐसे कथित ऐतिहासिक गलतियों के लिए निशाना बनाकर उन्हें पीड़ित करना चाहते हैं उनका कोई संवैधानिक या कानूनी आधार नहीं है.

