उद्धार के लिए उधार में मिले थे डॉ मनमोहन
हिन्दुस्तान टाइम्स में गोपाल कृष्ण गांधी ने लिखा है कि विपक्ष के नेता के लिए एक निवर्तमान राजनयिक का बहुत कम या कि महत्व नहीं होता लेकिन जब जुलाई 2000 में कोलंबो जाने से ठीक पहले लेखक ने तत्कालीन एलओपी डॉ मनमोहन सिंह से मिलना चाहा तो तुरंत मिलने का समय मिल गया. राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन द्वारा नियुक्ति के बाद श्रीलंका जाने से पहले बधाई देते हुए उन्होंने पूछा, “तो गोपाल, आप कांग्रेस को क्या करने या कहने की सलाह देंगे?”
लेखक ने बताया कि उन्होंने वही कहा जो उन्हें सही लगा यानी श्रीलंका में तमिलों के अधिकारों को लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम की मांगों के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए और भारत को राजनीतिक समाधान के लिए दबाव डालना चाहिए जो तमिल लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करे और श्रीलंका की संप्रभुता को बरकरार रहे. जाते हुए डॉ मनमोहन सिंह ने कहा, “गोपाल, तुम मेरे आशीर्वाद के साथ जाओ.”

