यह सब दो बिल्कुल मुख्तलिफ लोगों के बीच चिट्ठी के सिलसिले से शुरू हुआ.
साल 1913 में, गणितज्ञ जी एच हार्डी- यकीनन, एक प्रतिभावान व्यक्ति- को 10 पन्ने की एक चिट्ठी मिली जो कि मद्रास के एक शिपिंग क्लर्क ने उन्हें लिखी थी. चिट्ठी को दो दूसरे गणितज्ञों की तरह वह नजरअंदाज कर सकते थे; हालांकि तब शायद हम श्रीनिवास रामानुजन की विलक्षण प्रतिभा से अनजान रह जाते. शायद वो उस चिट्ठी की जो भूमिका थी जिसका असर हार्डी पर ऐसा हुआ कि उन्हें इसका जवाब देना पड़ा.
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