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'दिशोम गुरु': एक राजनीतिक शख्सियत, आदिवासी चेतना और आंदोलन के पर्याय

शिबू सोरेन सिर्फ एक मजबूत राजनीतिक हस्ताक्षर अथवा लीडर नहीं, आदिवासी चेतना, संघर्ष और आंदोलन के पर्याय थे.

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पिछले डेढ़ महीने से शिबू सोरेन के स्वस्थ होने को लेकर राजनीतिक गलियारे से लेकर समाज के हर वर्ग के लोग और उनके चाहने वाले प्रार्थनाएं कर रहे थे. लेकिन सोमवार, 4 अगस्त की सुबह शिबू सोरेन के अंतिम सांस लेने की आई खबर ने लाखों लोगों को झकझोर कर रख दिया. हर तरफ उदासी और देशभर से शोक संदेश का तांता. अपने-अपने तरीके से शिबू सोरेन को याद किया जाने लगा.

लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्या से गुजरते ‘दिशोम गुरु’ शिबू सोरेन को 19 जून को नई दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती कराया गया था. झारखंड के मुख्यमंत्री और शिबू सोरेन के पुत्र हेमंत सोरेन खुद लगातार दिल्ली में पिता की देखरेख में जुटे थे.

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