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भारतीय सैनिकों में जिंदा हैं सैम बहादुर, क्या उनके जैसा कभी कोई दूसरा होगा?

सैम के नैतिक बल और खरे स्वभाव से उसके विरोधी (नियंत्रण रेखा के उस पार और इस पार भी) खौफ खाते थे.

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(यह आर्टिकल पहली बार 11 दिसंबर 2023 में पब्लिश की गई थी. सैम मानेकशॉ का जन्म 3 अप्रैल 1914 को हुआ था. आज उनकी बर्थ एनिवर्सरी पर इस आर्टिकल को दोबारा पब्लिश किया गया है.)

भारत के लोगों ने जिंदादिली और जोश से भरपूर फील्ड मार्शल सैम एचएफजे मानेकशॉ एमसी (Field Marshal Sam HFJ Manekshaw MC) की जिंदगी पर बनी फिल्म सैम बहादुर (Sam Bahadur) में एक आदर्श ‘ऑफिसर और जेंटिलमैन’ को सुखद अनुभूति के साथ देखा. इस वक्त यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या सभी आदर्शों पर खरे दमदार शूरवीरों में वह आखिरी शख्स थे या क्या कोई और सैम बहादुर होना मुमकिन है?

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