युवा पत्रकार और लेखक सारंग उपाध्याय (Sarang Upadhyay) की उपन्यास सलाम बॉम्बे व्हाया वर्सोवा डोंगरी (Salaam Bombay Via Versova Dongri) को मैं एक प्रेम कहानी का नाम देना ज्यादा उचित समझूंगा. बॉम्बे से मुंबई बनी देश की आर्थिक राजधानी अपनी विषमताओं के लिए प्रसिद्ध है और सारंग ने बेहद खूबसूरती और जिस बारीकी से इस बदलाव को शब्दों में उकेरा है, वह अद्भुत है. उपन्यास के चरित्र, जिनकी अपनी-अपनी दुनिया है और देश में घट रही घटनाएं, उनको कैसे प्रभावित करती हैं, कैसे उनकी जिंदगियों में यू-टर्न लाती हैं, उसे सरल भाषा में मात्र 11 किस्सों में लिखना आसान काम नहीं है.
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सलाम बॉम्बे व्हाया वर्सोवा डोंगरी: 11 किस्सों-कविताओं में दर्ज प्रेम की दास्तां
Salaam Bombay Via Versova Dongri: अरफाना और जालना की इकलौती बेटी सायरा के इर्द-गिर्द ही यह पूरा उपन्यास गढ़ा गया है.

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