(यह खबर पहली बार 26 जनवरी 2023 को पब्लिश की गई थी. भारत अपना 75वां गणतंत्र दिवस मना रहा तो ये खबर 26 जनवरी 2024 को फिर से पब्लिश की गई है.)
(भारत के 74वें गणतंत्र दिवस के मौके पर हमारी खास सीरिज का यह भाग तीन है. पहले और दूसरे भाग को यहां पढ़ें.)
सबसे निर्मम और ‘दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र’ सियाचिन ग्लेशियर में बने युद्ध स्मारक पर एक शिलालेख है. उस पर लिखा है, “बर्फ के बीच, शांत रहते हैं, लेकिन जब बिगुल बजता है, उठते हैं और मार्च करते हैं.” यह स्मारिका बार-बार याद दिलाती है कि शस्त्रों को अपना धर्म और कर्म बनाने वालों की स्थिति क्या होती है. यह उनके बलिदान और शौर्य की कहानी याद दिलाती है. साथ ही बताती है कि अनुशासन को तोड़ा नहीं जा सकता. अनुशासन की सिर्फ कहानियां नहीं कही जातीं, लड़ाकों का पूरा जीवन अनुशासन में बंधा होता है. ये अनुशासन का ही तकाजा है कि सैनिक सिर्फ चलते, टहलते या दौड़ते नहीं हैं, युगों से नियम पूर्वक वो करते हैं 'मार्च'.

