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राम मंदिर: विजयघोष खुशहाली का रास्ता नहीं, फिर भारत के लिए आगे की राह क्या है?

सिर्फ राम के प्रति लोगों का जुनून अगले दशक तक भारत को मध्यम आय वाला देश बनने में मदद नहीं करने वाला है.

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व्यूज, क्लिक-बेट्स और एकतरफा वैचारिक झुकाव की वजह से हम अक्सर इतिहास के लंबे कालखंड की सच्चाई की उपेक्षा करते हैं. मानव इतिहास में सबसे लंबे समय तक ऐसी सभ्यताएं (पेगन सिविलाइजेशन) फलती फूलती रही थीं जो एक देवता को पूजने की बजाए प्रकृति की पूजा करती थीं. आज के जलवायु परिवर्तन के दौर और 'हरित' आजीविका खोजते इस युग में वही पुरानी सभ्यताएं हमें प्रकृति के साथ मिलकर रहने के बारे में बहुत कुछ सिखाती हैं. पेगन सिविलाइजेशन के लोग पेड़ों, ग्रहों, पानी, आग, जंगलों, जानवरों और बहुत कुछ की पूजा करते थे.

(अनुवादक की तरफ से नोट: दरअसल पश्चिम में पेगन सिविलाइजेशन उन सभ्यताओं को कहा जाता था जो प्राचीन धर्म के अनुयायी थे और कई देवताओं की पूजा करते थे. ये ईसाई धर्म, यहूदी धर्म और इस्लाम जैसे अन्य इब्राहीम धर्मों में विश्वास नहीं करते थे. इस स्टोरी में इसके लिए बहुदेववाद शब्द का भी प्रयोग किया गया है.)

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