कांग्रेस (Congress) के टॉप लीडरशिप ने जब से अयोध्या में राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा (Ram Mandir Pran Pratishtha) समारोह के निमंत्रण को अस्वीकार किया है, पार्टी को लगातार आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है. इस पर बहुसंख्यक समुदाय की भावनाओं को आहत करने, भगवान राम से मुंह मोड़ने और एक पवित्र कार्यक्रम का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया गया है. जैसा कि अनुमान था, ठीके वैसे ही भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपने मुख्य राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ हमले का नेतृत्व किया, और घोषणा की कि यह फैसला "भारत की संस्कृति और हिंदू धर्म" के प्रति कांग्रेस के विरोध को दिखाता है.
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राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा: कांग्रेस के न जाने के फैसले में दम, लेकिन क्या ये 'सेक्युलर' है?
कांग्रेस के तर्क में दम है, लेकिन दिए गए स्पष्टीकरण से फिर से वैचारिक स्पष्टता की कमी दिखती है.

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