ऐसा माना जाता है कि 6 दिसंबर 1992 को ध्वस्त बाबरी मस्जिद के खंडहरों से दूर जाते हुए लालकृष्ण आडवाणी, जिन्होंने यह सब शुरू किया था, ने अपने दिवंगत करीबी सहयोगी प्रमोद महाजन से उदास स्वर में कहा, "उन्होंने मेरे आंदोलन को नष्ट कर दिया है."
उस भयावह दिन पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सबसे शक्तिशाली मुद्दे को लेकर जो राजनीतिक झटका लगा, उस पर आडवाणी का स्पष्ट आकलन कई सालों बाद अनुभवी पत्रकार वीर सांघवी ने अपने ब्लॉग 'आस्क वीर' में जाहिर किया है.
विध्वंस के बाद की उथल-पुथल भरी घटनाओं ने आडवाणी को भविष्यवक्ता साबित कर दिया. एक साल बाद, बीजेपी तीन उत्तरी राज्यों यूपी, मध्य प्रदेश और राजस्थान में विधानसभा चुनाव हार गई.

