हमारे संविधान निर्माण में अद्भुत योगदान पर कृतज्ञ राष्ट्र हर साल बीआर अंबेडकर को उनके जन्मदिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित करता है. भारत की संविधान सभा में संसदीय शासन प्रणाली के लिए उनकी पैरवी उत्कृष्ट थी और इसे अब भी लाजवाब माना जाता है. लेकिन यह देखते हुए कि हमारी संसद ने कितना कमजोर प्रदर्शन किया है, देश को उनके तर्कों पर पुनर्विचार करना चाहिए ताकि हम समझ सकें कि क्या गलत हो रहा है और क्यों?
अंबेडकर का मूल तर्क 4 नवंबर 1948 को सभा में दिए गए उनके प्रसिद्ध संबोधन 'स्थायित्व बनाम उत्तरदायित्व' में सामने आया था. इस समय तक संविधान बनते लगभग दो साल हो गए थे, और सभा द्वारा संसदीय प्रणाली अपनाने के लिए 'संघटन संविधान समिति' की अनुशंसा स्वीकार किए लगभग डेढ़ साल बीत चुका था.
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Topics: बीआर अंबेडकर संविधान
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