ट्विटर के चीफ जैक डोरसी भारत को अशांत करके खुद शांति की तलाश में विपश्यना करने चले गए. कैसे ठीक होगी भारतीय समाज की वो बीमारी, जिसका नाम 'ब्राह्मणवादी पितृसत्ता' है?
जैक डोरसी का अपराध ये नहीं है कि उन्होंने पितृसत्ता के खिलाफ पोस्टर पकड़ा. पितृसत्ता का विरोध एक आसान चीज है. कोई भी पढ़ा-लिखा आदमी नहीं मिलेगा, जो कहे कि वह पितृसत्ता का समर्थक है. ये लगभग वैसी ही बात है कि सच बोलना चाहिए. हिंसा नहीं करनी चाहिए. बोलते सभी हैं, लेकिन समाज में झूठ भी बोला जाता है और हिंसा भी खूब होती है. जो आदमी निजी या सामाजिक जीवन में पितृसत्ता के हिसाब से औरतों के साथ बर्ताव करता है, वह आदमी भी मजे से पितृसत्ता के खिलाफ जुलूस में नारे लगा सकता है.

