महात्मा गांधी ने अंग्रेजी सत्ता के कब्जे से नमक को आजाद कराने के लिए सत्याग्रह किया. अंग्रेजों के जाने के बाद नमक केंद्र सरकार के अधीन आ गया. 70 सालों के अंदर नमक के किसानों का बड़ा हिस्सा मजदूर बन गया. सीएजी ने नमक उत्पादन पर नवीनतम रिपोर्ट में बताया गया है कि मजदूर पीने के पानी के लिए भी तरह रहे हैं. बच्चे पढ़ने के लिए तरस रहे हैं, वो नहीं जानता है कि घर की छत्त क्या होती है, नमक उत्पादन के दुष्प्रभाव के कारण उसकी आंखें- अतड़ियां और जिस्म के दूसरे हिस्से नाकाम होते जाते हैं लेकिन, दवा और इलाज से दूर हैं.
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गुजरात के नमक किसान: जमीन कंपनियों को मिली, खुद बन गए बेबस मजदूर
गुजरात में नमक किसानों की बदहाली पर सीएजी रिपोर्ट ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं.

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