लोकतांत्रिक भारत में महिलाओं की लामबंदी का एक लंबा और प्रभावशाली इतिहास रहा है.
फिर वो इकोफेमिनिस्ट चिपको आंदोलन हो, मथुरा बलात्कार विरोधी आंदोलन और डिग्निटी मार्च हो, ग्रामीण महिलाओं का शराब के खिलाफ सामूहिक विरोध करना हो, निर्भया के गैंगरेप के बाद सार्वजनिक प्रदर्शन हो, सीएए-एनआरसी, कृषि कानून - इन सब आंदोलन या प्रदर्शन के बाद देश की नीतियों में परिवर्तन आया है. क्योंकि जब भी महिलाएं सड़क पर उतरती हैं, तो वो चूकती नहीं हैं.

