जब भारतीय जनता पार्टी विपक्ष में थी, तो उसने राष्ट्रपति शासन लागू करने के हर प्रयास का विरोध करते हुए ऐसी कार्रवाई को चुनी गई सरकार को अस्थिर करने वाला करार दिया था. पर सत्ता में आने के बाद बीजेपी वही करती नजर आ रही है, जिसका वह तब विरोध करती थी.
अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन इस बात का ताजा उदाहरण है.
लगता है कि अभी तक किसी सरकारी नौकरशाह ने प्रधानमंत्री मोदी को चेताया नहीं है कि राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की कोशिश का वही हश्र होगा, जो 1999 में वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के बिहार में राष्ट्रपति शासन लगाने के निर्णय का हुआ था.
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