2004-05 आसपास की घटना है. प्रेमचंद (Premchand Jayanti 2022)को दलित विरोधी बताकर जलाया जा रहा था और पिछले 2 -3 वर्षों से ऐसे अनालेख अशोध प्रकाशित किये जा रहे हैं जिसमें प्रेमचंद को सनातन संस्कृति का सिपाही घोषित किया जा रहा है. प्रेमचंद को अपने तरीके से, अपने बनाए गए सांचे में तैयार कर परोसा जा रहा है. यह एक प्रकार की प्रायोजित आलोचना है, जिसका लाभ किनको मिलेगा यह किसी से छिपा नहीं है.
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Topics: Munshi Premchand
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