कृपया मेरी इस वेदना पर यकीन करें कि 30 साल के अपने पत्रकारीय जीवन में मैंने कभी किसी एक खबर का ब्यौरा जानने के लिए इतनी मगजमारी या इतनी मेहनत नहीं की, जितना बीते चार दिनों में ‘गरीब कल्याण रोजगार अभियान’ का ब्यौरा जानने के लिए की. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि तमाम सरकारी शोर-शराबे से लेकर डुगडुगी बजाकर मुनादी करवाने के चिरपरिचित अंदाज के साथ शुरू हुई 50,000 करोड़ रुपये की योजना में ‘गरीब, कल्याण और रोजगार’ तीनों का वास्ता था. यही तीनों तो असली ‘भारत’ हैं.
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