(स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री मोदी के भाषण पर एक नजरिया ये भी)
यह कहना कि देश के स्वतंत्रता दिवस (Independence Day) पर एक भारतीय प्रधानमंत्री का भाषण महत्वपूर्ण अवसर होता है, सिर्फ पुरानी बातों को दोहराने जैसा है. प्रधानमंत्री, चाहे वह किसी भी पार्टी से हों, इसका इस्तेमाल आत्मप्रशंसा के लिए नहीं कर सकते और न ही इसका इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को बदनाम करने के लिए किया जा सकता है. इसे चुनावी भाषण के रूप में तो बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं किया जा सकता.
कारण एकदम साफ है.
भारत की आजादी किसी एक राजनीतिक दल या किसी एक राजनीतिक नेता ने हासिल नहीं की थी. इसी तरह स्वतंत्रता के बाद भारत का राष्ट्र-निर्माण किसी एक राजनीतिक दल ने नहीं किया था, और किसी एक प्रधानमंत्री ने तो कतई नहीं किया था.

