“फूलन हमका मिल जाए तो कच्चौ चबा जैहैं”- बेहमई की एक छोटी सी बच्ची सीता ने ये बात मुझसे 1998 में कही थी. सीता की उम्र उस वक्त 17 साल थी. उम्र भले ही 17 की हो, लेकिन सीता की हाइट सिर्फ एक फुट थी. सीता को कोई बीमारी नहीं थी, बल्कि 14 फरवरी 1981 को डाकुओं ने सीता को चारपाई से उठा कर पटक दिया था. ये वही तारीख थी, जब फूलन देवी ने बेहमई में बीस लोगों को लाइन में खड़ाकर के गोलियों से भून डाला था. पांच गोलियां मार कर सीता के पिता बनवारी सिंह की छाती छलनी कर दी गई थी.
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Topics: हत्याकांड कोर्ट का फैसला फूलन देवी
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