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प्रदर्शन करने का अधिकार तो है, लेकिन इसके खतरे बहुत हैं

संविधान विरोध करने के अधिकार की गारंटी देता है, लेकिन शांतिपूर्ण प्रदर्शनों की राह में रोड़े बढ़ते जा रहे हैं.

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हमारे संविधान का अनुच्छेद 19 (1) (a) बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी के मूलभूत अधिकार की गारंटी देता है. लेकिन इस गारंटी के बावजूद कई लोगों को इस बात की आशंका है कि यह मूलभूत अधिकार किस हद तक उनकी रक्षा करेगा.

जैसे, पिछले साल जब एक पत्रकार ने एक राज्य के नेतृत्व में संभावित बदलाव का कयास लगाया तो उस पर राजद्रोह का मामला दर्ज कर दिया गया. बेशक, उसने कभी इसकी उम्मीद नहीं की होगी.

बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी पर अतार्किक पाबंदियों के ऐसे कितने ही मामले हैं. उनमें से हरेक का उल्लेख यहां जरूरी नहीं है.

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