पाकिस्तान (Pakistan) के लाहौर में सेना के एक कमांडर का घर जला दिया गया. रावलपिंडी में सेना के मुख्यालय पर हमला किया गया. उन क्रोधित नागरिकों को सैन्य संस्थानों पर धावा बोलते हुए देखना क्या ही नजारा था.
और सबसे ज्यादा आश्चर्य वाली बात यह थी कि यह सब हुआ कैसे?
क्या अपने पसंदीदा लीडर को गिरफ्तार होते देखने के बाद भीड़ भड़की? 75 सालों से ज्यादा दिनों के बाद क्या पाकिस्तान के लोग आखिरकार खुद को दमन की व्यवस्था से मुक्त कर रहे थे और दमन के खिलाफ लड़ रहे थे?

