एक बार फिर से यह वैसा ही वक्त है. पाकिस्तान (Pakistan) को नया सेना प्रमुख मिलना है. कोई और लोकतांत्रिक देश होता तो यह शायद सामान्य नियुक्ति वाला मामला होता लेकिन पाकिस्तान में नए सेना प्रमुख का चुना जाना टीवी डिबेट बन जाता है.
जैसे-जैसे इमरान खान (Imran Khan) सड़कों पर आगे बढ़ रहे हैं. पाकिस्तान में हर गलत चीज और हर गलती के लिए सेना पर आरोप मढ़ा जा रहा है. आर्मी चीफ के लिए ना बताया जाने वाले विशेषणों का इस्तेमाल किया जा रहा है. यह सब अभूतपूर्व है.
इसके अलावा, यह महत्वपूर्ण नहीं है कि कौन आर्मी चीफ बनता है. जिस तरीके से यह सब होता है उससे इसका भविष्य तय होगा. भारत के लिए यह सब काफी महत्वपूर्ण हो जाता है. आखिरकार, पड़ोस में उठापटक कोई सामान्य बात तो नहीं है.

