हमें पाकिस्तान (Pakistan) में इमरान खान (Imran Khan) को हाल में सुनाई गई सजा और 2018 में पिछले आम चुनाव से पहले मियां नवाज शरीफ की सजा के बीच की जा रही गलत तुलनाओं में कतई नहीं उलझना चाहिए.
सबसे पहली बात, मियां नवाज शरीफ के खिलाफ फैसले में भ्रष्टाचार के सबूतों की कमी थी. इसके मुकाबले इमरान खान ने खुद अपने ऊपर लगे आरोपों को कुबूल किया है. (उदाहरण के लिए तोशाखाना मामले में उन्होंने कहा था- मेरी घड़ी, मेरी मर्जी- यानी तोहफे बेचने और उनसे होने वाली कमाई डिक्लेयर नहीं करना. ऐसे ही सरकारी गोपनीयता कानून मामले में, उन्होंने कबूला कि उन्होंने ‘एक गुप्त दस्तावेज/ साइफर के कंटेंट अपने लोगों से शेयर किए, उसे अपने पास रखना और फिर उसे खो दिया).

