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पहलगाम आतंकी हमला: सुरक्षा बलों की निश्चिंतता या इंटेलिजेंस की नाकामी?

संजीव कृष्ण सूद लिखते हैं कि जिस क्षेत्र में लंबे समय से संघर्ष चल रहा है, वहां लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं है.

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पहलगाम में निर्दोष पर्यटकों पर हमला सिर्फ कायरतापूर्ण कृत्य नहीं है, बल्कि यह कश्मीर और कश्मीरियों की आत्मा पर हमला है. इस कृत्य के जरिए आतंकवादियों ने पिछले कुछ महीनों से घाटी में कायम शांति और सौहार्द को गहरा आघात पहुंचाया है.

यह हमला ऐसे समय हुआ है जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भारत के आधिकारिक दौरे पर हैं. गौर करने वाली बात है कि यह हमला पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर के संबोधन के कुछ ही दिनों बाद हुआ है. विदेश में बसे पाकिस्तानों को संबोधित करते हुए जनरल मुनीर ने इस बात पर जोर दिया था कि कश्मीर पाकिस्तान का ताज है.

यह तो तय है कि कश्मीर में अशांति फैलाने में पाकिस्तान का हाथ है और इस हमले की योजना और क्रियान्वयन आतंकवादियों ने पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं के इशारे पर किया होगा. हालांकि, हमें उन आंतरिक कारकों का भी विश्लेषण करना चाहिए, जिसकी वजह से आतंकवादियों ने इस कृत्य को अंजाम दिया.
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