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UPSC टॉपर टीना डाबी की सफलता ‘बोनस मार्क्स’ ने नहीं लिखी

क्या सफलता के लिए किसी खास जाति का होना मायने रखता है?

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2015 UPSC की परीक्षा में अव्वल रहकर टीना डाबी ने रिकार्ड कायम किया. उसकी सफलता के पीछे का कारण उसका दलित होना नहीं था. एक दलित होने के कारण उसे कोई बोनस अंक नहीं मिले थे! उसे UPSC की ओर से जारी मेरिट लिस्ट में रैंक #1 घोषित किया गया था. उसने अपनी मेहनत से यह मुकाम पाया.

अगर आप सोच रहे हैं कि हम इस बारे में क्या बात कर रहे हैं, तो चलिए हम समझने में आपकी मदद करते हैं. हाल ही में ‘टीना डाबी और आरक्षण विवाद’ शीर्षक से एक ब्लॉग पोस्ट काफी वायरल हुआ. ब्लॉग में आरोप लगाया गया कि आरक्षण के दम पर उसने परीक्षा पास की है. इसके बाद कमेंट का दौर चल पड़ा कि “आरक्षण योग्यता को मारता है.”

“आरक्षित” का मतलब “अयोग्य”?

हाँ, कुछ लोगो का यह मानना है कि “आरक्षित” का मतलब “अयोग्य” है. डाबी पहली दलित महिला हैं जिन्होंने UPSC परीक्षा में टॅाप किया. लेकिन उसकी सफलता लोगों को हजम नहीं हुई. उसे तथाकथित ‘दलित’ कार्ड और व्यवस्थित जाति आधारित घृणा के कारण लगातार ऑनलाइन ट्रलिंग का सामना करना पड़ा.

एक दलित होकर UPSC में उसने परचम लहराया. इसके लिए उसे भी बहुत कुछ करना पड़ा.

  • UPSC की परीक्षा तीन चरणों में आयोजित होती है प्रिलिम्स, मेंस और इंटरव्यू.
  • 2015 में प्रिलिम्स के लिए कट-ऑफ सामान्य वर्ग के लिए 107.34 और अनुसूचित जाति वर्ग के लिए 94 था.
  • डाबी ने प्रिलिम्स के पेपर-1 में 96.66 हासिल किए जो, स्पष्ट रुप से उल्लेखित है कि 94 नंबर के कट-ऑफ से ज्यादा था.
  • अनुसूचित जाति वर्ग का होने के कारण उसे प्रिलिम्स में मदद मिली.
  • पेपर-2 पास करने के लिए 66 नंबर लाने होते हैं. डाबी ने इसमें 98.73 नंबर पाए.
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