जाओ पहले उस आदमी का साईन लेकर आओ जिसने मेरे हाथ पर ये लिख दिया कि सभी देशवासी टैक्सचोर हैं. अजीब देश है भारतवर्ष भी. और अजीब हैं हम सब भारतवासी.
एक ओर हम अपने से अलग जाति, धर्म, भाषा, संस्कृति वालों पर विश्वास नहीं करते. दूसरी तरफ हम अपने प्रिय प्रधानमंत्री पर विश्वास कर बैठे हैं कि 500-1000 रुपए के नोटबंदी से देश का कालाधन खत्म हो जाएगा. भ्रष्टाचार खत्म हो जाएगा. आतंकवाद खत्म हो जाएगा. जाली नोट खत्म हो जाएंगे.
मुश्किल से एक या दो प्रतिशत टैक्सचोरों की वजह से 98 प्रतिशत देशवासी अपने खून-पसीने का पैसा बैंक में जमा कराने या निकालने के लिए लाइनों में खड़े हैं.
नहीं खड़े हैं तो सिर्फ वो लोग, जो टैक्स की चोरी करते रहे हैं. जिनकी वजह से कालाधन बनता रहा है. नेता, सरकारी बाबू, बड़े वकील, बड़े डॉक्टर, पुलिस अफसर. क्या इनमें से किसी को बैंक की लंबी लाइनों में लगे देखा है.

