उरी हमले के बाद भारत के अंदर गुस्सा और बेचैनी चरम पर है. यह गुस्सा अपने अस्पष्ट शत्रु के खिलाफ है, उन आतंकवादियों के खिलाफ है, जिसने भारतीय सेना के कैंप पर हमला किया और कायराना तरीके से सोते हुए जवानों की हत्या कर दी, यह गुस्सा इन आतंकवादियों के प्रायोजक पाकिस्तानी सेना के खिलाफ भी है.
यह बेचैनी भारत सरकार और विशेषकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ भी है, जो कांग्रेस की मनमोहन सिंह सरकार से बेहतर तरीके से अधिक कठोरता से पाकिस्तानी विश्वासघात से निपटने और देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत बनाने के वादों के साथ सत्ता पर काबिज हुए हैं.
अभी तक भारत को पठानकोट हमले के कलंक से गुजरना पड़ा था, जहां सैन्य हवाई अड्डे पर आतंकी हमला हुआ और इसके लिए रावलपिंडी को कोई सजा नहीं दी जा सकी. अब इस बात का डर है कि उरी में भी उसी की पुनरावृति होगी, शुरुआत में थोड़ा गुस्सा दिखाई देगा, सोशल मीडिया पर आक्रोश दिखाई देगा और फिर सब कुछ पहले की तरह सामान्य हो जाएगा.

