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संविधान को दरकिनार करने की PM मोदी की कोशिशों का जवाब ‘बायकॉट’ नहीं

New Parliament Inauguration: अगर PM मोदी संविधान को पवित्र ग्रंथ मानते तो संसद का उद्घाटन राष्ट्रपति कर रही होतीं

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मई 2014 में पदभार संभालने के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने कहा था कि उनके लिए भारत का संविधान एक “पवित्र ग्रंथ” है. उन्होंने यह भी कहा कि यह उनकी सरकार के लिए एकमात्र “धर्म ग्रंथ” होगा.

इस बात को ध्यान में रखते हुए इस सवाल पर कोई चर्चा ही नहीं होनी चाहिए थी, विवाद तो छोड़ दीजिए कि, “भारत के नए संसद भवन (New Parliament) का उद्घाटन किसे करना चाहिए था?” जाहिर है- भारत के राष्ट्रपति को करनी चाहिए थी. अगर वह संविधान के शब्दों और भावना पर चलते हैं तो यह भारत का प्रधानमंत्री नहीं होना चाहिए था.

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