मशहूर कवि केदारनाथ अग्रवाल ने ‘अंडे पर अंडा’ कविता लिखते समय जब सरकार की ताकत आजमाइश पर व्यंग्य किया था, तब कहां सोचा था कि अंडा सचमुच राजनीतिक हथकंडा बन जाएगा. खान-पान के राजनीतिक दांवपेंच से जनता को झांसा दिया जाएगा. मांसाहार-शाकाहार पर समुदायों की गोलबंदी की जाएगी. अंडा यह सब कर रहा है.
फिलहाल अंडा फिर चर्चा में है क्योंकि राष्ट्रीय शिक्षा नीति यानी NEP 2020 के तहत एक्सपर्ट ग्रुप ने एक पोजीशन पेपर ड्राफ्ट किया है और इसे पब्लिक डोमेन में पेश किया गया है. इसमें आयुर्वेद के भ्रामक संदर्भों के साथ कहा गया है कि मिड डे मील को प्लान करते समय अंडे, फ्लेवर्ड मिल्क, बिस्कुट वगैरह को इस्तेमाल नहीं करना चाहिए क्योंकि यह मोटापा और हार्मोनल असंतुलन पैदा करते हैं. मीट और अंडे, दोनों लाइफस्टाइल डिसऑर्डर की वजह होते हैं. यानी कुल मिलाकर, बहस भी वही है, अंडा मिड डे मील से हटा दिया जाए.

