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सेना नहीं, अदालतों की वजह से रक्षा सेवाओं में आ रही हैं महिलाएं

सेना की नीति के कारण आज भी महिलाओं की भर्ती आसान नहीं है, पर कोर्ट के चलते सेना में महिलाओं की संख्या बढ़ी है.

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जब महिला सैनिक अपने पूरे सैनिक वेश में निकलती है, तो देश का सीना गर्व और देशभक्ति के जज्बे से चौड़ा हो जाता है. सशक्ति‍करण, समानता, काम करने के समान अवसर जैसे जुमले इस्तेमाल किए जाने लगते है. सरकारी दफ्तरों में बैठे बड़े अधिकारी नारी शक्ति का गुणगान करते हैं और मीडिया को टीआरपी बढ़ाने का मसाला मिल जाता है.

पर इन सारी कवायद के पीछे की विडंबना इस आडंबर का असली चेहरा दिखाती है. रक्षा सेवाएं आज भी महिलाओं को अपनाना नहीं चाहती. आज अगर नारी शक्ति इस क्षेत्र में अपनी पहचान बनाती नजर आ रही है, तो इसके पीछे सेना या सरकार की महिलाओं का खुली बाहों से स्वागत करने वाली कोई नीति नहीं, बल्कि न्यायालयों के आदेशों की ताकत है, खासकर दिल्ली हाईकोर्ट के आदेशों की.

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